अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इस हदीस में बताया है कि अल्लाह के निकट सबसे तुच्छ और घटिया व्यक्ति वह है, जो अपना ऐसा नाम रखे कि उससे ऐसी महानता एवं श्रेष्ठता झलकती हो, जो अल्लाह के सिवा किसी के लिए उचित नहीं है, जैसे शहंशाह का शब्द है, इसमें एक तरह से अल्लाह की बराबरी और हमसरी (समानता) का दावा है। इसलिए इस नाम का इनसान अल्लाह के निकट सबसे अप्रिय और घटिया है। हदीस के इस टुकड़े का एक अर्थ यह भी हो सकता है कि वह अल्ललाह के निकट सबसे नापसंदीदा लोगों में से एक है। फिर आपने यह स्पष्ट कर दिया कि इस धरती और उसके सारे राजाओं एवं प्रजाओं का वास्तविक स्वामी अल्लाह है। इस हदीस में उन लोगों के लिए भी शिक्षा एवं नसीहत है, जो लोगों को उपाधियाँ, उनका अर्थ जाने बिना ही बाँटते रहते हैं, कि कहीं वे भी उस चीज़ में न पड़ जाएँ, जिससे इस हदीस में सावधान किया गया है। अल्लाह हम सब को इससे बचाए।