इस हदीस में झूठ से बहुत ज़्यादा सावधान किया गया है और उन लोगों को विनाश की चेतावनी दी गई है, जो लोगों को हँसाने के लिए झूठ बोलते हैं। यह एक बहुत बुरी बात, सख़्त हराम काम और बुरा आचरण है, जिससे मुसलमान को बचना एवं दूर रहना चाहिए और उसकी ज़बान को झूठ से पवित्र होनी चाहिए, चाहे परिस्थिति जो भी हो। हाँ, जहाँ शरीयत ने अनुमति दी है, वहाँ बात अलग है। फिर, जिस तरह लोगों को हँसाने के लिए झूठ बोलना हराम है, उसी तरह श्रोताओं के लिए सुनना भी हराम है, यदि वे उसके झूठ होने से अवगत हों। बल्कि, ऐसी परिस्थिति में उसका खंडन भी ज़रूरी है।