जिसने अल्लाह की प्रसन्नता की प्राप्ति के उद्देश्य से किसी भी चीज़, जैसे खाने, पहनने, सवार होने की वस्तुओं अथवा नक़्दियों में से दो वस्तुएँ सदक़ा कीं, उसे फ़रिश्ते जन्नत के द्वारों से उनके आगमन का स्वागत करते हुए पुकार कर कहते हैं : तुम दुनिया से बहुत-से पुण्य के कार्य कर आए हो, जिनका आज तुम्हें बहुत ज़्यादा प्रतिफल दिया जाएगा। अधिक नमाज़ पढ़ने वालों को नमाज़ के द्वार से पुकारा जाएगा और वे उसी से अंदर प्रवेश करेंग, अधिक सदक़ा करने वालों को सदक़ा के द्वार से पुकारा जाएगा और वे उसी से अंदर प्रवेश करेंगे, अधिक रोज़ा रखने वालों का स्वागत फ़रिश्ते अर-रय्यान नामी द्वार के पास करेंगे और उन्हें उसी से अंदर जाने का आग्रह करेंगे। ज्ञात हो कि "الرَّيَّان" शब्द का अर्थ है वह चीज़ जो प्यास मिटाने का कार्य करे। चूँकि रोज़ादार पानी पीने से बचने के कारण प्यास झेलता है, विशेष रूप से लंबे गर्मी के दिनों में तो और अधिक, तो बदले में उन्हें जन्नत में दायमी सैराबी प्रदान की जाएगी, जिसमें वे "अल-रय्यान" नामी द्वार से प्रवेश करेंगे। जब अबू बक्र -रज़ियल्लाहु अनहु- ने यह हदीस सुनी, तो उन्होंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! "मेरे माता-पिता आपपर क़ुरबान हों" जो व्यक्ति इन द्वारों से अंदर जाएगा, उसे न किसी कमी का सामना करना पड़ेगा और न कोई घाटा उठाना पड़ेगा। "भला कोई व्यक्ति ऐसा भी होगा, जिसे इन तमाम द्वारों से पुकारा जाएगा?" तो आपने फ़रमाया : "हाँ, ऐसे लोग भी होंगे और मैं आशा करता हूँ कि तुम उन लोगों में शामिल रहोगे।"