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इब्ने अब्बास -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं कि सूरा “साद” का सजदा उन सजदों में नहीं है जो अनिवार्य हैं। अलबत्ता मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को इसमें सजदा करते देखा है।
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
हर त्रुटि के लिए सलाम फेरने के बाद दो सजदे हैं।
हमें मुग़ीरा बिन शोबा ने नमाज़ पढ़ाई और दो रकात के बाद खड़े हो गए। हमने 'सुबहानल्लाह' कहा, तो उन्होंने भी 'सुबहानल्लाह' कहा और नमाज़ जारी रखी। जब नमाज़ पूरी करके सलाम फेर चुके तो, त्रुटि के दो सजदे कर लिए। जब नमाज़ से बाहर आ गए, तो फ़रमायाः...
जब आदम की संतान सजदे वाली आयत पढ़ती है और सजदा करती है, तो शैतान रोता हुआ दूर हट जाता है, वह कहता है: हाय मेरी बरबादी! आदम की संतान को सजदे का आदेश दिया गया और उसने सजदा किया, तो उसके लिए जन्नत है, जबकि मुझे सजदे का आदेश दिया गया, तो मैंने ...
जब तुममें से किसी को नमाज़ में संदेह हो जाए और याद न रहे कि कितनी रकात पढ़ी है, तीन अथवा चार? तो संदेह को परे डाल दे और जिस पर यक़ीन हो, उसे आधार बनाए। फिर सलाम फेरने से पहले दो सजदे कर ले।...