Share as Image
Share as Text
Add Explanation
Remove Explanation
ज़ैद बिन साबित -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सामने सूरा 'नज्म' तिलावत की, तो आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उसमें सजदा नहीं किया।
सह़ीह़ - इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
हमें मुग़ीरा बिन शोबा ने नमाज़ पढ़ाई और दो रकात के बाद खड़े हो गए। हमने 'सुबहानल्लाह' कहा, तो उन्होंने भी 'सुबहानल्लाह' कहा और नमाज़ जारी रखी। जब नमाज़ पूरी करके सलाम फेर चुके तो, त्रुटि के दो सजदे कर लिए। जब नमाज़ से बाहर आ गए, तो फ़रमायाः...
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने उन्हें नमाज़ पढ़ाते समय सूरा «إذا السماء انْشَقَّتْ» पढ़ी और तिलावत का सजदा किया। जब नमाज़ पढ़ चुके, तो उन्होंने बताया कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने भी इस सूरा में सजदा किया है।...
अगर नमाज़ के बारे में कोई नया आदेश आया होता, तो मैं तुम्हें ज़रूर बता देता। लेकिन मैं भी तुम्हारी तरह एक इनसान हूँ, जिस तरह तुम भूलते हो, मैं भी भूलता हूँ। इसलिए जब मैं भूल जाऊँ, तो मुझे याद दिला दिया करो। और तुममें से जिसे अपनी नमाज़ में श...
मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा कि क्या सूरा 'हज्ज' में दो सजदे हैं? तो फ़रमायाः "हाँ, तथा जो दोनों सजदे न करना चाहे, वह उन दोनों आयतों को न पढ़े।"...