नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और क़ुरैश के काफ़िरों के बीच समझौता था तथा आपने कुछ मुश्रिकों के रक्त को हलाल कर दिया था और उनको क़त्ल करने का आदेश दे दिया था। जब मक्का विजय हो गया, तो आप उसमें सावधानी के साथ दाख़िल हुए। आपके सर पर फौलादी टोपी थी। कुछ सहाबा ने ख़तल के बेटे को काबा के परदों से चिमटा हुआ पाया। उसने क़त्ल से बचने के लिए काबा की हुरमत की शरण ले रखी थी। क्योंकि उसे अपने कुकर्मों के बारे में पता था। सहाबा ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से संपर्क किए बिना उसे वध करने को मुनासिब न जाना। जब आपसे पूछा, तो फ़रमाया कि उसे क़त्ल कर दो। चुनांचे उसे हजर-ए-असवद और मक़ाम-ए-इबराहीम के बीच क़त्ल कर दिया गया।