जब अरफ़ा के दिन सूर्यास्त हुआ, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) वहाँ से मुज़दलिफ़ा के लिए निकल पड़े और वहाँ मग़रिब की नमाज़ को विलंब करके मग़रिब एवं इशा की नमाज़ एक साथ पढ़ी। दोनों नमाज़ों के लिए अलग-अलग इक़ामत कही गई। आपने दोनों नमाज़ों के बीच नफ़ल नहीं पढ़ी, ताकि एकत्र करने का अर्थ सिद्ध हो सके और उन दोनों के पश्चात भी कोई नफ़ल नहीं पढ़ी, ताकि हज के शेष कामों की तैयारी के तौर पर कुछ विश्राम कर सकें।