अबू उमामा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से मरफ़ूअन वर्णित है : "जिसने जिहाद नहीं किया अथवा किसी मुजाहिद को तैयार नहीं किया अथवा किसी मुजाहिद के पश्चात उसके घर वालों की देख-रेख नहीं की, अल्लाह उसे क़यामत से पहले ही किसी न कसी आपदा में ग्रस्त कर देगा।" ह़सन - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।
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व्याख्या