उम्मे हबीबा (रज़ियल्लाहु अंहा) के पिता की मृत्यु हुई और उन्होंने सुन रखा था कि पति के सिवा किसी की मौत पर तीन दिन से अधिक सोग मनाना जायज़ नहीं है, इसलिए उन्होंने इसका पालन करके दिखाने का इरादा किया। चुनांचे ज़रदी मिली हुइ खुशबू मँगवाकर हाथों से मल लिया और इसका कारण यह बताया कि उऩ्होंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना हैः जो स्त्री अल्लाह और क़यामत के दिन पर ईमान रखती हो, उसके लिए हलाल नहीं है कि किसी मृत पर तीन दिन से अधिक सोग मनाए, सिवाय पति के कि उसपर चार माह दस दिन सोग मनाएगी।