हज्जतुल वदा के अवसर पर एक सहाबी अरफ़ा में अपनी सवारी पर एहराम की अवस्था में खड़े थे कि उससे गिर पड़ेे और उनकी गरदन टूट गई तथा वह मर गए। तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उन्हें आदेश दिया कि अन्य मुर्दों की तरह उन्हें पानी और बेर के पत्तों से स्नान कराया जाए और उनकी एहराम की लुंगी तथा चादर में कफ़न दे दिया जाए। चूँकि वह हज का एहराम बाँधे हुए थे और उनके शरीर पर इबादत के आसार बाक़ी थे, इसलिए नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उन्हें खुशबू लगाने और उनके सिर को ढाँपने से मना कर दिया। साथ ही अपने साथियों को इसकी हिकमत भी बता दी। हिकमत यह है कि अल्लाह उन्हें उसी अवस्था में जीवित करके उठाएगा, जिस अवस्था में उनकी मृत्यु हुई है। वह तलबिया पुकार रहे होंगे, जो हज का खास चिह्न है।