माइज़ बिन मालिक अस्लमी -अल्लाह उन्से प्रसन्न हो- नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर अपने ही विपरित ज़ेना करने का साक्ष्य दिया -उस समेय आप मसजिद में थे-, तो आप ने उन से मुख मोड़ लिया, ताकि वह वापस चले जाएं, और अल्लाह से क्षमा याचना कर लें। किन्तु वह अपने ऊपर क्रोधित और अपने उपर हद क़ायेम करके पवित्र करने के कठोर विचार के साथ आए थे, इस लिए फिर आप के सम्मुख आकर दोबारा इक़रार किया। तो भी नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उन से मुख मोड़ लिया, यहाँ तक कि उन्हों ने अपने विरोध चार बार साक्ष्य देकर ज़ेना का इक़रार कर लिया, तब आप ने उन से पूछाः क्या तुम पागल हो? कहाः नहीं। उन्के घर वालों सो भी उन्के दिमाग के बारे में पूछा, तो उन्हों ने अच्छा ही कहा। फिर पूछाः तुम शादी कर चुके हो या नहीं, क्योंकि गैर शादी शुदा को रज्म नहीं किया जाता? कहाः हाँ, शादी कर चुका हुँ। आप ने उन से पूछा, कि शायद उन्होंने हद को अनिवार्य करनेवाला कर्म न किया हो, अर्थात केवल छुआ या चुंबन किया हो, तो उन्हों ने ज़ेना की पुष्टी कर दी। जब आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इन बातों की पुष्टी कर ली और हद लागू करना अनिवार्य हो गया, तो सहाबा को संगसाार करने का आदेश दिया। चुनांचे सहाबा उन्हें बक़ीउल-ग़रक़द -मसजिद ए नबली के समीप स्थित एक जनाज़ा गाह का नाम- ले गए, और उन्हें पत्थर मारना आरंभ कर दिया, जब पत्थर की चोट लगने लगी, तो भागना चाहा, इस लिए कि मनुष्य इसे सह नहीं सक्ता और भाग गए, लेकिन लोगों ने उन्हें पकड़ कर मार डाला,अल्लाह उन पर दया करे तथा उन से प्रसन्न हो।