इस हदीस में बताया गया है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मस्जिद के एक भाग में अपने लिए चटाई का एक कमरा बना लिया। ऐसा लगता है कि आप एतिकाफ़ की अवस्था में थे। आप उस कमरे के अंदर रात की नमाज़ पढ़ा करते थे। कुछ लोगों ने सुना, तो आए और आपकी इमामत में नमाज़ पढ़ने लगे। लेकिन कुछ रातों के बाद उन्हें आपकी आवाज़ सुनाई नहीं दी। ऐसे में उन्होंने यह समझ कर कि कहीं आप सो न गए हों, जगाने के लिए कुछ आवाज़ें निकालने लगे। यह सुन आप बाहर आए और लोगों से बताया कि आप सोए नहीं थे, बल्कि आपको इस बात का डर हो गया कि कहीं लोगों पर रात की नमाज़ फ़र्ज़ न कर दी जाए। फिर बताया कि अगर फ़र्ज़ कर दी जाए, तो लोग उसे अदा नहीं कर पाएँगे। साथ ही यह भी बताया कि लोगों की सबसे अच्छी नफ़ल नमाज़ वह है, जो घर में पढ़ी जाए।