अनस रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : “अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक साअ से पाँच मुद तक पानी से स्नान करते और एक मुद पानी से वज़ू करते थे।”
स़ह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जनाबत का स्नान एक साअ से पाँच मुद और वज़ू एक मुद पानी से कर लिया करते थे। साअ चार मुद का होता है और मुद एक मध्यम शरीर वाले इन्सान की दोनों हथेलियों भर का होता है।
हदीस का संदेश
यह हदीस वज़ू तथा स्नान करते समय पानी बचाने और ज़रूरत से अधिक पानी खर्च करने से मना करती है, चाहे पानी उपलब्ध ही क्यों न हो।
वज़ू और स्नान करते समय आवश्यकता अनुसार और कम से कम पानी का प्रयोग करना मुसतहब है, और यही अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का तरीक़ा है।
इस हदीस का उद्देश्य वज़ू और स्नान की सुन्नतों तथा आदाब का ख़्याल रखते हुए, पानी के इस्तेमाल में फ़ुज़ूलखर्ची और कंजूसी किए बिना, समय और पानी की उपलब्धता एवं अनुपलब्धता को ध्यान में रखते हुए, वज़ू एवं स्नान करने के कार्य संपूर्ण रूप से संपन्न कराना है।
अरबी शब्द जनाबत का प्रयोग हर उस व्यक्ति के लिए होता है, जिसने वीर्य स्खलन या संभोग किया हो। जनाबत को जनाबत इसलिए कहा जाता है कि इस अवस्था में इन्सान पाक हो जाने तक नमाज़ और इबादतों से दूर रहता है।
सा एक प्रसिद्ध मापक पात्र है। यहाँ मुराद सा-ए-नबवी है, जिसका वज़न उत्कृष्ट प्रकार के गेहूँ का 480 मिस्क़ाल और लीटर में तीन लीटर है।
मुद एक शरई माप एकाई है। इससे मुराद एक सामान्य शरीर वाले इन्सान की दोनों हथेलियों भर चीज़ है, जब उनको पूरा फैलाकर भरा जाए। मुद एक चौथाई साअ् है, इसपर सारे फ़क़ीह एकमत हैं। इसकी मात्रा 750 मिलीलीटर होती है।