अबू मूसा अशअरी (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास उस समय पहुँचा, जब आप एक ताज़ा मिसवाक से दाँत साफ़ कर रहे थे। वह कहते हैंः मिसवाक का एक किनारा आपकी ज़ुबान पर था और आप उसे मुँह में लेकर ओ, ओ कर रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे आप उलटी कर रहे हों। सह़ीह़ - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
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व्याख्या

अबू मूसा अशअरी कहते हैं कि वह नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए, तो देखा कि आप ताज़ा मिसवाक से दाँत साफ़ कर रहे हैं, क्योंकि इससे सफ़ाई अधिक होती है। वह मुँह के भीतर टूटती भी नहीं है कि किसी प्रकार का कष्ट हो। आप मिसवाक को जीभ पर रखकर इस तरह मिसवाक करने में अत्युक्ति कर रहे थे कि लग रहा था कि जैसे उल्टी कर रहे हों।