आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- के पास मदीने की दो बूढ़ी यहूदी महिलाएँ आईं और कहने लगीं कि मरे हुए लोगों को क़ब्र के अंदर अज़ाब होता है। आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- ने उन दोनों को झुठला दिया और उनकी पुष्टि करना पसंद नहीं किया। क्योंकि यहूदियों के झूठ, धर्म के नाम पर झूठी बातें घड़ने की आदत और अल्लाह की किताब के साथ छेड़-छाड़ से सब लोग परिचित थे। चुनांचे दोनों चली गईं। फिर जब अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- के पास आए और उन्होंने आपको दोनों यहूदी महिलाओं की बात सुनाई, तो आपने कहा : उनकी बात सही है। मरे हुए लोगों को क़ब्र में यातना दी जाती है, जिसे सारे चौपाये सुनते हैं। आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- बताती हैं कि उन्होंने इसके बाद अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जब भी कोई नमाज़ पढ़ते हुए देखा, तो आपने क़ब्र की यातना से अल्लाह की शरण माँगी।