अबुल अला बिन उमैर- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैं क़तादा बिन मिलह़ान के पास उनकी मृत्यु के समय था उसी समय उनके घर के काफी दूर से एक व्यक्ति गुजरा, तो मैंने उस व्यक्ति के गुजरने को क़तादा के चेहरे में देखा, जब मैंने उनको देखा तो ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उनके मुख पर तेल मल दिया गया हो। वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनके मुख पर अपना हाथ फेरा था। सह़ीह़ - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
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व्याख्या