अबूज़र गिफ़ारी (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "क्या मैं तुम्हें वह शब्द न बताऊँ, जो अल्लाह के निकट सबसे प्रिय है? अल्लाह के निकट सबसे प्रिय शब्द हैः 'سبحان اللهِ وبحمدِهِ' (अर्थात अल्लाह पवित्र है अपनी प्रशंसा के साथ।)" सह़ीह़ - इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
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व्याख्या

यह हदीस इस बात का प्रमाण है कि तसबीह सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह के निकट सबसे प्रिय वाणी है, क्योंकि तसबीह का अर्थ है अल्लाह को उन तमाम उपमाओं, समानताओं, कमियों एवं अनुचित बातों से पवित्र घोषित करना, जो उसके योग्य नहीं हैं। कहने वाले का यह कहना "अपनी प्रशंसा के साथ" दरअसल इस बात का एतराफ़ है कि तसबीह भी पवित्र अल्लाह की प्रशंसा के कारण संभव हो सकी, अतः यह भी उसी का एहसान है। इसका एक अन्य अर्थ हो सकता है : मैं उसकी पवित्रता उसकी प्रशंसा के साथ बयान करता हूँ, क्योंकि उसी ने मुझे पवित्रता बयान करने का सुयोग प्रदान किया है। अतः (سبحان الله وبحمده) अल्लाह के निकट सबसे प्रिय वाणी है, क्योंकि उसके अंदर अल्लाह की पाकी का भी बयान है और उसकी प्रशंसा भी है।