यह दोनों हदीसें अत्याचार के हराम होने के प्रमाणों में से दो प्रमाण हैं। इसके अंदर अत्याचार के सारे रूप समाहित हैं, जिसका एक रूप अल्लाह का साझी बनाना भी है। दोनों हदीसों में आपके शब्दों : "अत्याचार क़यामत के दिन का अंधेरा है।" का अर्थ है, अत्याचार क़यामत के दिन अत्याचार करने वाले के लिए इस प्रकार निरंतर अंधेरा होगा कि उसे रास्ता सुझाई नहीं देगा। जबकि दूसरी हदीस में आपके शब्दों : "लालच (कंजूसी) से बचो, क्योंकि इसीने तुम्हारे पूर्वजों का विनाश किया है" द्वारा कंजूसी से सावधान किया गया है और यह बताया गया है कि जब समाज के अंदर लालच व्यापक रूप से फैल जाए, तो यह उसके विनाश की निशानी है। क्योंकि इसी के कारण अत्याचार, सरकशी, द्वेष तथा रक्तपात का बाज़ार गर्म होता है।