अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है, वह कहते हैं कि हम अपनी लड़ाइयों में शहद और अंगूर प्राप्त करते, तो उसे खा लेते और तक़सीम के लिए अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास भेजते नहीं थे। सह़ीह़ - इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
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व्याख्या