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अली बिन अबू तालिब -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- से मरफ़ूअन वर्णित है : "वयस्क हो जाने के बाद आदमी अनाथ नहीं रहता और रात होने तक दिन भर ख़ामोश रहने का कोई औचित्य नहीं है।"
सह़ीह़ - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।
अबू बकर सिद्दीक़ -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- अहमस समुदाय की ज़ैनब नामी एक महिला के पास गए, तो देखा कि वह बात नहीं कर रही है।...
जिसने क़सम खाते हुए कहा: बेशक मैं इस्लाम से बरी हूँ, और वह झूठा है, तो वह वैसा ही है, जैसा कि उसने कहा है और यदि वह सच्चा है, तो इस्लाम में सुरक्षित नहीं लौट सकेगा...
ऐ अब्दुर्रहमान बिन समुरा! सत्ता न माँगो, क्योंकि यदि माँगने पर सत्ता दिए गए, तो तुम उसी के हवाले कर दिए जाओगे...
ईसा बिन मरयम -अलैहिस्सलाम- ने एक व्यक्ति को चोरी करते देखा, तो उससे कहाः क्या तूने चोरी की है? उसने कहाः बिलकुल नहीं, उस अल्लाह की क़सम, जिसके सिवा कोई वंदनीय नहीं है। इस पर ईसा -अलैहिस्सलाम- ने कहाः मैं अल्लाह पर ईमान लाया और अपनी आँख को झ...