मुश्रिकों ने ख़ंदक़ युद्ध के अवसर पर एक दिन नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और आपके सहाबा को पहरेदारी और मदीने की निगरानी में इतना व्यस्त रखा कि वे अस्र की नमाज़ नहीं पढ़ सके और सूरज डूब गया। अतः, आप और आपके साथी सूरज डूबने के बाद ही अस्र की नमाज़ पढ़ पाए। यही कारण है कि आपने उनके हक़ में बददुआ की कि अल्लाह उनके पेटों, घरों तथा क़ब्रों को आग से भर दे। क्योंकि उन्होंने अस्र की नमाज़ से रोकने के साथ-साथ, जो सबसे उत्तम नमाज़ है, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके साथियों को कष्ट भी दिया था।