आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) कहती हैं कि मैंने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पूछा : नमाज़ में इधर उधर देखना कैसा है? तो आपने उत्तर दिया : "यह एक प्रकार की चोरी है, जो शैतान बंदे की नमाज़ में करता है।" सह़ीह़ - इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।