अनस (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि नबी (सलल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके ख़लीफ़ों के साथ लंबे समय तक रहने के बावजूद उन्होंने उनमें से किसी को नमाज़ में "بسم الله الرحمن الرحيم" पढ़ते हुए नहीं सुना। न सूरा फ़ातिहा पढ़ने से पहले न बाद में। बल्कि, वे नमाज़ "الحمد لله رب العالمين" से शुरु करते थे। ज्ञात हो कि बिस्मिल्लाह पढ़ने और ऊँची आवाज़ से पढ़ने के बारे में उलेमा के कई मत हैं। लेकिन, सबसे सही मत यह है कि नमाज़ी प्रत्येक रकअत में सूरा फ़ातिह़ा से पहले धीमी आवाज़ में बिस्मिल्लाह कहेगा, चाहे नमाज़ धीमी आवाज़ में क़िराअत वाली हो या ऊँची आवाज़ में क़िराअत वाली।