इस हदीस में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अल्लाह के रास्ते में जिहाद की फ़ज़ीलत तथा उसमें शरीक होने वाले व्यक्ति को मिलने वाले शानदार प्रतिफल का उल्लेख करते हुए कहा है कि जो व्यक्ति अल्लाह के रास्ते में ज़ख़्मी होता है और फिर मर जाता है या ठीक हो जाता है, वह क़यामत के दिन सारी सृष्टियों के सामने जिहाद में शामिल होने और इसके कारण कष्ट उठाने की निशानी के साथ उपस्थित होगा। क्योंकि उसका ज़ख़्म ताजा होगा और उससे ऐसी चीज़ बह रही होगी, जिसका रंग रक्त जैसा होगा, लेकिन उससे कस्तूरी जैसी ख़ुशबू फूट रही होगी।