जब नमाज़ खड़ी हो जाए और खाने या पीने की चीज़ सामने उपस्थित हो, तो पहले खाने-पीने से फ़ारिग हो जाना चाहिए। ताकि भूख-प्यास की शिद्दत ख़त्म हो जाए और नमाज़ पढ़ते समय नमाज़ी का ध्यान खाने की ओर न जाए, बल्कि वह एकाग्र होकर नमाज़ पढ़ सके। लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि नमाज़ का वक्त तंग न हो तथा भूख लगी हुई हो। इस हदीस से पता चलता है कि हमारी शरीयत एक संपूर्ण शरीयत है और उसने आसानी तथा उदारता के साथ-साथ प्राण के अधिकार का भी ख़याल रखा है।