अबू सुलैमान खालिद बिन वलीद (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं: बेशक मेरे हाथों मूतह की जंग में नौ तलवारें टूटी हैं। मेरे हाथ में केवल एक यमनी तलवार रह गई थी। सह़ीह़ - इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।