प्रतिष्ठा एवं अभिमान दो ऐसे गुण हैं, जो अल्लाह के साथ खास हैं और इन गुणों में उसका कोई साझी एवं शरीक नहीं है। बिल्कुल वैसे ही, जैसे इन्सान अपनी चादर एवं तहबंद जैसे वस्त्रों में किसी को साझी बनाना गवारा नहीं करता। अतः ये दोनों गुण उसी के साथ लाज़िम हैं और ये अल्लाह की उन विशेषताओं में से हैं, जिनमें उसका कोई साझी नहीं है। ऐसे में, जिसने प्रतिष्ठा एवं अभिमान का दावा किया, उसने अल्लाह की बादशाहत में उससे खींचतान की। और जो अल्लाह से खींचतान करेगा, उसे वह यातना देगा।