इस हदीस में उस व्यक्ति को बड़ी कठोर चेतावनी दी गई है, जो लोगों की बात चुपके से सुने और वे इस बात को पसंद न करते हों कि उनकी बात सुनी जाए। दरअसल यह इनसान के अंदर पाया जाने वाला एक बुरा आचरण है, जो कि महा पाप है। फिर, क़यामत के दिन इनसान को उसी प्रकार का बदला मिलेगा, जिस प्रकार का उसका कर्म रहा हो। यही कारण है कि उसके कानों में सीसा पिघलाकर डाला जाएगा। फिर इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि सुनने वाला सही उद्देश्य से सुने या बिना किसी उद्देश्य के। क्योंकि कुछ लोगों को यह बात पसंद नहीं होती कि उनकी बात कोई सुने। यद्यपि उनकी बात में कोई दोष, खराबी या किसी के प्रति कोई बदज़ुबानी न हो।