अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इस हदीस-ए-क़ुदसी में बताया है कि अल्लाह की ओर से जिस व्यक्ति की परीक्षा इस प्रकार ली जाए कि उसके किसी प्रिय, जैसे संतान, भाई, चचा, पिता, माता या मित्र की मृत्यु हो जाए और वह अल्लाह के यहाँ प्रतिफल प्राप्त होने की आशा में उसकी जुदाई पर सब्र कर ले, तो उसका प्रतिफल जन्नत के सिवा कुछ और नहीं है।