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आयशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है, उन्होंने फरमाया किः नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक बार सारी रात एक आयत को ही निरंतर पढ़ते हुए क़्याम किया।
सह़ीह़ - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।
ऐ क़ुरआन वालो ! वित्र पढ़ा करो, निश्चित ही अल्लाह वित्र (विषम) है तथा वित्र को पसंद करता है।
हे लोगों, सलाम फैलाओ (प्रचारित करो), लोगों को खाना खिलाओ, रिश्तेदारियों को जोड़ो, रात्रि में जब लोग सो रहे होते हैं, तो उठ कर नमाज़ पढ़ो, (ऐसा करने पर) सुरक्षित रूप से जन्नत में प्रवेश पा जाओगे।...
जो सोया रह जाए और वित्र न पढ़ सके, अथवा भूल जाए, तो उसे चाहिए कि जब याद आए तब पढ़ ले।
जो व्यक्ति अपनी रात की पूरी नमाज़ या उसका कुछ भाग पढ़े बिना सो जाए, फिर प्रातः उठकर फज्र तथा ज़ुहर के बीच पढ़ ले, उसे ऐसा लिखा जाएगा, जैसे उसने उसे रात ही में पढ़ी हो।...