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वाइल बिन हुज्र- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब- नमाज़ में- रुकू करते तो अपनी ऊंगलियों को फैला कर रखते तथा जब सज्दा करते तो अपनी ऊंगलियों को मिला लेते थे।
सह़ीह़ - इसे इब्ने ह़िब्बान ने रिवायत किया है ।
जब तुम नमाज़ पढ़ो तो अपनी सफ़ें सठीक कर लो। फिर तुममें से एक व्यक्ति तुम्हारी इमामत करे। फिर जब वह तकबीर कहे, तो तुम तकबीर कहो...
अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) फ़ज्र की अंतिम रकात में, रुकू से सिर उठाने और 'سَمِعَ الله لمن حَمِدَه رَبَّنا ولك الحَمْدُ' कहने के बाद कहतेः ऐ अल्लाह, अमुक, अमुक और अमुक पर लानत कर। इसी पर अल्लाह तआला ने यह आयत उतारीः (لَيْسَ لَك...
रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब तकबीर (अल्लाहु अकबर) कहते, तो अपने दोनों हाथों को कानों के बराबर उठाते और जब रुकू करते, तो अपने दोनों हाथों को कानों तक उठाते।...
मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को देखा कि आप लोगों को नमाज़ पढ़ा रहे थे और उमामा बिंत अबुल आस, जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुपुत्री ज़ैनब की बेटी थीं, आपके कंधे पर थीं। जब आप रुकू करते, तो उनको उतार देते और जब सजदे से उठते, त...