जाबिर बिन समुरह (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का मुअज़्ज़िन देर करता और इक़ामत नहीं कहता था, यहाँ तक कि जब देख लेता कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) निकल आए हैं, तो इक़ामत कहता। सह़ीह़ - इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
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व्याख्या