यह हदीस बताती है कि स्त्री निकाह में वली नहीं बन सकती। न अपने निकाह में और न किसी और के निकाह में। जिस निकाह में कोई स्त्री स्वयं अपनी शादी कराए, वह अवैध निकाह है। जहाँ तक इस हदीस के शब्द : "ऐसी महिला जो स्वयं अपना विवाह कर लेती है वह ज़ानिया (दुराचारी) है" की बात है, तो ये शब्द अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- के हैं। वह कहना यह चाहते हैं कि निकाह कराने की ज़िम्मेवारी किसी स्त्री का उठाना दरअसल दुराचारी महिला का काम है। वली के बिना निकाह होना ही नहीं चाहिए।